Diwali k dohe|Deepawali ka bakhan
दीप जलते हैं, जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर, को लेता है हर।
आते ही दीपावली,
गूंज उठती हर एक गली,
मन तो प्रफुल्लित होता ऐसे,
युगों के बाद खिली कली।
जोर जोर से शोर है होता,
दीपावली को कोई न सोता,
मानो उस दिन खुशियाली का
हर कोई बीज है बोता,
बूढ़े हो जाते उस दिन जवान,
वो अपनी वाणी से करते दीपावली का बखान,
बच्चों के साथ खेल कर, बूढ़े हो जाते बच्चों सामान,
बुढ़ापे के सारे रोग, लक्ष्मी माता लेती हर,
दीप जलते हैं जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
चारों तरफ फैल जाती खुशहाली
वृक्षों में जुगनू चमकते तो ,
दीपक जलाए हुए हैं डाली
प्रेम की होती है बौछारें,
पुत्र अपनी माता को पुकारे,
माता कर देती पुत्र को निहाल,
धन-धान्य देकर कहती इसको संभाल,
ले जाकर इसको अच्छे से घर
दीप जलते हैं जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
सेठो को तो इस दिन का इंतजार होता है,
क्योंकि उन्हें लक्ष्मी से ज्यादा ही प्यार होता है,
अंग अंग में छा जाती उमंग,
चाहे उसमें लगा हो कितना भी जंग,
छा जाती खुशी पाँव से लेकर के सर,
दीप जलते हैं जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
मदिरा और जुआ की शान है बढ़ती,
ये जानकर भी पत्नी पति से नहीं झगड़ती,
जुआ चाहे वो हारे चाहे वो जीते,
मदिरा तो वह खूब है पीते,
उनको नहीं होता है पैसों का डर ,
दीप जलते हैं जग-मगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
Happy diwali 2018
दीप जलते हैं, जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर, को लेता है हर।
आते ही दीपावली,
गूंज उठती हर एक गली,
मन तो प्रफुल्लित होता ऐसे,
युगों के बाद खिली कली।
जोर जोर से शोर है होता,
दीपावली को कोई न सोता,
मानो उस दिन खुशियाली का
हर कोई बीज है बोता,
बूढ़े हो जाते उस दिन जवान,
वो अपनी वाणी से करते दीपावली का बखान,
बच्चों के साथ खेल कर, बूढ़े हो जाते बच्चों सामान,
बुढ़ापे के सारे रोग, लक्ष्मी माता लेती हर,
दीप जलते हैं जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
चारों तरफ फैल जाती खुशहाली
वृक्षों में जुगनू चमकते तो ,
दीपक जलाए हुए हैं डाली
प्रेम की होती है बौछारें,
पुत्र अपनी माता को पुकारे,
माता कर देती पुत्र को निहाल,
धन-धान्य देकर कहती इसको संभाल,
ले जाकर इसको अच्छे से घर
दीप जलते हैं जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
सेठो को तो इस दिन का इंतजार होता है,
क्योंकि उन्हें लक्ष्मी से ज्यादा ही प्यार होता है,
अंग अंग में छा जाती उमंग,
चाहे उसमें लगा हो कितना भी जंग,
छा जाती खुशी पाँव से लेकर के सर,
दीप जलते हैं जगमगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
मदिरा और जुआ की शान है बढ़ती,
ये जानकर भी पत्नी पति से नहीं झगड़ती,
जुआ चाहे वो हारे चाहे वो जीते,
मदिरा तो वह खूब है पीते,
उनको नहीं होता है पैसों का डर ,
दीप जलते हैं जग-मगाता है घर,
उजाला आकर तिमिर को लेता है हर।
Happy diwali 2018
jitendra Tiwari